भारत में बनेंगी स्पुतनिक-V टीके की सालाना 10 करोड़ डोज़, ये भारतीय कंपनी करेगी निर्माण

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Photo:AP

भारत में बनेंगी स्पुतनिक-V टीके की सालाना 10 करोड़ डोज़, ये भारतीय कंपनी करेगी निर्माण 

नयी दिल्ली। रूस का प्रत्यक्ष निवेश कोष आरडीआईएफ और औषधि कंपनी पैनेसिया बॉयोटेक ने सोमवार को कहा कि वे स्पुतनिक-V कोविड-19 टीके की भारत में सालाना 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करने पर सहमत हुए हैं। संयुक्त बयान के अनुसार पैनेसिया बॉयोटेक के विनिर्माण संयंत्रों में स्पुतनिक-V के उत्पादन से इस टीके की आपूर्ति आरडीआईएफ (रसियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड) के अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को करने में मदद मिलेगी। 

आरडीआईएफ के सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) किरील दमित्रिएव ने कहा, ‘‘पैनेसिया बॉयोटेक के साथ सहयोग भारत में टीके के उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है।’’ पैनेसिया बॉयोटेक के प्रबंध निदेशक राजेश जैन ने कहा कि कंपनी स्पुतनिक-V का उत्पाद अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त संयंत्रों में करेगी। 

चिकित्सा क्षेत्र की प्रमुख पत्रिका लैंसेट के अनुसार स्पुतनिक वी 91.6 प्रतिशत कारगर है। इसे वैश्विक स्तर पर 59 देशों में पंजीकृत किया गया है। बयान के अनुसार स्पुतनिक-V की कीमत प्रति खुराक 10 डॉलर से कम है। 

कोविड-19 की दूसरी लहर का मुकाबला करने को भारत तैयार

वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस महामारी की पहली लहर को सफलतापूर्वक संभालने के बाद भारत अब इसकी दूसरी लहर का मुकाबला करने के लिये बेहतर ढंग से तैयार है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि भारत बेहतर और मजबूत बनने की राह पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘वित्त वर्ष 2020-21 में ऐतिहासिक महामारी से जूझने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर बेहतर और मजबूत बनाने की ओर अग्रसर है। यह बात कई उच्च- आवृत्ति वाले संकेतकों के रुझान को देखते हुये परिलक्षित होती है।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि इस शानदार वापसी का मार्ग प्रशस्त करने में आत्मनिर्भर भारत मिशन द्वारा समर्थित निवेश वृद्धि और आम बजट 2021-22 में बुनियादी ढांचे तथा पूंजीगत व्यय में भारी बढ़ोतरी से मजबूती मिली है। रिपोर्ट में कहा गया कि फरवरी के मध्य से दैनिक नए मामलों में बढ़ोतरी भारत में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर की शुरुआत हुई, हालांकि पहली लहर और दूसरी लहर के बीच 151 दिनों का अंतर रहा, जबकि दूसरे देशों में यह अंतर काफी कम था। 





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